कलम संगिनी

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कविताएं (12)

हिन्दी तो चिर अविनाशी है

हिन्दी तो चिर अविनाशी है *मेरी हिन्दी तो चिर अविनाशी है* *भाषा नहीं, संस्कृति की आत्मा है।* *डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र 'आदित्य'* ...
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श्री जनकल्याणेश्वर मंदिर में वैदिक विधि से जन्मदिन यज्ञ मनाया गया

*श्री जनकल्याणेश्वर मंदिर में वैदिक विधि से जन्मदिन मनाया गया* श्री जनकल्याणेश्वर महादेव मंदिर, लेन नंबर 12 बी, सैनिक नगर लखनऊ में गायत्री यज्ञ के ...
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धर्मशाला-डलहौज़ी यात्रा का सुकून

दो दशक का इंतज़ार, वर्षों का सुकून दे गया — डलहौजी और धर्मशाला प्रवास जीवन में कुछ यात्राएँ केवल घूमने-फिरने के लिए नहीं होतीं, वे एक लंबे समय से संज...
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कविता - वीरों का शौर्य

विषय-"वीरों का शौर्य" वीरों का शौर्य दीप बने, हर युग का अभिनंदन है, उनके साहस से महक रहा, भारत का उपवन है। जब भी नभ पर छाए बादल, तुम ...
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बटेर के अंडे: राष्ट्रनिर्माण की पत्रकारिता

*बटेर के अंडे और राष्ट्रनिर्माण की पत्रकारिता* कहते हैं कि ज्ञान ही शक्ति है। परन्तु यह बात उस युग की है जब ज्ञान का अर्थ वेद, विज्ञान, दर्शन या अन...
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माँ माँ होती है, माँ माँ होती है

*माँ माँ होती है* माँ माँ होती है, माँ अनुपमेय होती है। माँ ममता की सागर होती है। प्रेम वात्सल्य की कभी रिक्त न होने वाली गागर होती है। माँ...
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जीवन निरंतर गीत है

जीवन निरंतर गीत है जीवन निरंतर एक गीत है, हम दिल से गाते हैं, जीवन की इस धारा को, सुर में सजाते हैं…॥,,,,,,, जीवन एक निर्झर गीत है ,बहता जाए चुप...
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मां की ममता

मां की ममता माँ तेरे आँचल में छिप जाऊँ मैं, तेरी ममता की छाँव में मुस्काऊँ मैं। दुनिया की धूप जब मुझको सताती है, तेरी गोद में हर दर्द भुल जा...
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माँ का आँचल

*माँ का आँचल : एक संस्मरण* *मेरा सैनिक जीवन और मेरी दादी माँ, माँ* मैं एक सैनिक हूँ, मैं अब रिटायर्ड हूँ, मेरी माँ की कहानी, मेरी अपनी जुबान...
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वेद माता गायत्री की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा

*वेदमाता गायत्री की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा* यह सूचित करते हुए अति प्रसन्नता हो रही है कि आज दिनांक 23 अप्रैल 2026, बृहस्पतिवार, बैसाख शुक्ल सप्...
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ये कैसा सवाल है

तुम्हें मेरी याद आती है? मेरी बिटिया अक्सर मुझसे यही पूछती है… और मैं मुस्कुराकर कहती हूँ— “नहीं… क्योंकि मैं तुम्हें कभी भूलती ही नहीं, जो याद करूँ...
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मां दंतेश्वरी

काव्य गीत ओड़िया झूली झुली आसुछी मो दंतेश्वरी माई देखी देखी ताकूं आमी हउच्छू बाई केते ढंग री असुछी मो दंतेश्वरी माई,, कांटा झुला री बसीच्छी म...
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